षट्कोण 49 – गे (革) | क्रांति / रूपांतरण (केचुली उतारना)
निर्णय (समग्र अर्थ)
गे परिवर्तन, आवश्यक बदलाव और नवीनीकरण का प्रतीक है। जैसे साँप अपनी केचुली उतारता है, वैसे ही यह समय पुराने को छोड़कर नए के लिए स्थान बनाने का है। लेकिन सच्ची क्रांति लापरवाह नहीं होती—उसे सही समय, तैयारी और परिस्थितियों के साथ तालमेल चाहिए। बुद्धिमान व्यक्ति स्पष्टता और उद्देश्य के साथ परिवर्तन अपनाता है, ताकि बदलाव टिकाऊ सुधार लाए।
छवि (प्रतीकात्मक अर्थ)
झील के ऊपर जलती अग्नि—परिवर्तन की तीव्र शक्ति जो वास्तविकता को नया रूप देती है। अग्नि शुद्ध करती है और झील प्रतिबिंब देती है; इसलिए क्रांति को शुद्धिकरण और विवेक—दोनों चाहिए।